लेखन: भरत एस तिवारी
Bharat S Tiwari
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27/2/13
आठवां
4 टिप्पणियां:
परिंदा बन रहा हूँ
परों पर कोपलें
उग रही हैं
सुना है
तुमने
सात आकाश बनाये हैं
मुझे आठवां देखना है
और तुम जिस आकाश से देखते हो
उसमें तुम्हे
देख लेता हूँ
खिड़की का पर्दा हटा कर
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