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17/6/12

Kya kaha jaaye ! क्या कहा जाये

10 टिप्‍पणियां:
सियासत से बच न पायी
खबरनवीसों की खुदायी 

हाथ जिसके कलम थमायी 
उसने सच को आग लगायी 

हुक्मरां के खून की अब 
लालिमा है धुन्धलायी 

ना चढ़े अब कोइ कालिख 
पर्त ज़र की रंग लायी  

नाम-ए-धर्म के खिलौने 
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई 

वक्त की कहते खता वो
ले रहे जैसे जम्हाई 

देश का प्रेमी बना वो 
इक मुहर नकली लगायी 

सोन चिड़िया फ़िर लुटी है
सब विभीषण हुए भाई 

चोर की दाढ़ी जिगर में 
अब ‘शजर सब ने छुपाई
सादर भरत तिवारी, नई दिल्ली, १७.०६.१२.

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