अपनी अध्भुत सोंच और कलम से एक बार फिर विस्मय करते भाई नरेन्द्र व्यास जी ने वक्त की चाल को दिखा दिया है ... मंत्रमुग्ध भरत तिवारी
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16/7/11
बेढंगा समय और उसकी चालें... नरेन्द्र व्यास
at
8:40 pm
9/6/11
समुंद्र मंथन … नरेन्द्र व्यास
छाया चित्र : इंटरनेट से
नरेंद्र भाई... बिना सांस लिए पूरी कविता पढ़ गया..इतनी गति है इसमे...
कितने गहरे शब्द इस्तेमाल किए हैं जैसे बलुआ देह...
at
1:04 am
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